लकी स्टोन का चमत्कार, सुजीत पहलवान और चमत्कारी अंगूठी की कहानी

एक गांव में सुजीत नाम का एक पहलवान रहता था। वह खूब मेहनत करता था, और दिनभर कसरत करता था। एक दिन वह खेलने के लिए कुश्ती के मैदान में पहुंचा, लेकिन वह बुरी तरह हार गया। इसका उसे बहुत दुख हुआ। दूसरे दिन सुजीत उठकर एक ज्योतिषी के पास जा पहुंचा, और अपना भाग्य दिखाने लगा। उसका भाग देखकर ज्योतिषी ने कहा कि

इस समय तुम्हारा भाग्य सही नहीं चल रहा है।  तुम जो भी काम करोगे, वह व्यर्थ ही जाएगा। तुम्हें सफलता नहीं मिलेगी।

यह कर सुजीत ने ज्योतिषी से पूछा गुरुजी ! तो अब मैं क्या करूं?

ज्योतिषी बोले, सुजीत तुम्हारा अच्छा समय भी आएगा! लेकिन उसके लिए तुम्हें अभी 1 साल का इंतजार करना पड़ेगा। 1 साल तक यदि तुम जो कोई भी काम करोगे, वह सारा खराब चला जाएगा। यह सुनकर सुजीत का मन उदास हो गया। तभी ज्योतिषी ने सुजीत से कहा कि तुम जब तक इस गांव में मेरा प्रचार करो। मैं अपने अपने शिष्य को भी तुम्हारे साथ भेज देता हूं।

ज्योतिषी की बात सुनकर सुजीत ज्योतिषी के शिष्य के साथ गांव में उसका महिमामंडन करने में जुट गया। शाम को जब घर पहुंचा तो सुजीत की पत्नी ने कहा इस तरह घूमने से क्या होगा? अगले हफ्ते तुम्हारी कुश्ती है। सुजीत ने बाबा के द्वारा बताई सारी बात अपनी पत्नी को बता दी। यह सुनकर सुजीत की पत्नी चकरा गई। 

सुजीत रोज गांव में निकलकर ज्योतिषी बाबा का महिमामंडन करने लगा। यह देखकर सुजीत की पत्नी को बहुत बुरा लगा, कि अच्छा खासा पहलवान अपना काम छोड़कर किसी और काम में लग गया है. 

शाम को फिर सुजीत भरा गया। सुजीत की पत्नी ने एक अंगूठी देते हुए सुजीत से कहा कि, यह लो ज्योतिषी बाबा ने तुम्हारे लिए भेजा है। उन्होंने कहा है कि यह पहन कर यदि तुम कुश्ती खेलोगे तो जरुर जीतोगे। यह देखकर सुजीत फूला नहीं समाया, और वह अंगूठी  पहन ली।  दूसरे दिन सुजीत कुश्ती के मैदान में पहुंच गया, और अपने तो अपने प्रतिद्वंदी को जमीन की धूल चटा दी. कुश्ती के मैदान में चारों तरफ सुजीत सुजीत के नारे लगने लगे. सुजीत खूब खुश हुआ। कुश्ती जीतने के बाद वह सीधे अपनी पत्नी के पास पहुंचा, और अंगूठी का चमत्कार बताने लगा।  तभी पत्नी ने कहा कि यह चमत्कारी पत्थर नहीं है,और ना ही किसी बाबा ने भेजा था। यह पत्थर तो सिर्फ अपने घर के कोने में पड़ी हुई ईट का टुकड़ा है। ना तो इस पत्र में कोई शक्ति है ना ही कुछ और मैं सिर्फ इतना बताना चाह रही थी, कि सारी शक्तियां तुम्हारे अंदर है.  किसी के कहने से कुछ नहीं होता काम करने से ही फल मिलता है। 

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