सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री अब्दुल मोमिन ने दिल्ली यात्रा टाली

सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री अब्दुल मोमिन ने दिल्ली यात्रा टाली

एके अब्दुल मोमिन बांग्लादेश के विदेश मंत्री। उन्हें 12 दिसंबर को शाम 2 दिन के लिए भारत दौरे पर आना था।  उनका दौरा शुरू होने में कुछ ही घंटे बचे थे, कि खबर आई कि वह नहीं आ रहे हैं। उन्होंने भारत की अपनी यात्रा रद्द कर दी है। यात्रा रात करने की वजह अब्दुल मोमिन ने यह बताई कि उन्हें अपने यहां विजय दिवस में हिस्सा लेना है। क्योंकि स्टेट मिनिस्टर बाहर गए हैं, और विदेश सचिव भी बाहर है। तो वह बांग्लादेश में ही रुक रहे हैं। लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि, क्या यही असली वजह है यात्रा रद्द करने की?

तो यह है विदेश मंत्री के दौरा रद्द होने की असली बजह

इस बात का जवाब जानने के लिए हमें ज्यादा समय नहीं लगा। क्योंकि 11 दिसंबर को ही अब्दुल मोमिन ने सीएबी यानि सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल Citizenship Amendment Bill 2019 और इससे जुड़े बांग्लादेश के जिक्र पर एक अखबार में कहा था, कि बांग्लादेश में हिंदुओं के ऊपर अत्याचार को लेकर भारत सरकार जो कह रही है। वह गैर जरूरी और गलत है। अगर अमित शाह कुछ महीने बांग्लादेश में रह कर देखें तो वह हमारे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल दे सकते हैं। हम बांग्लादेश में किसी को उसके धर्म के आधार पर जज नहीं करते हैं। यहां सारे लोग बांग्लादेश नागरिक हैं।  उनके अपने देश में कई मुश्किलें हैं। उन्हें उनसे लड़ने दीजिए। उससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। एक दोस्त के तौर पर हम उम्मीद करते हैं कि भारत ऐसा कोई काम नहीं करेगा। जिससे कि हमारी दोस्ती पर असर पड़े। इस बयान को दिए 1 पूरा दिन भी नहीं बीता और उनकी भारत यात्रा रद्द की जाने की खबर आई है। 

पीटीआई भी बोली, इसी बजह से नहीं आए अब्दुल मोमिन


न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है, कि इस यात्रा के रद्द किए जाने का बैकग्राउंड अमेंडमेंट बिल 2019 Citizenship Amendment Bill है। इस बिल में भारत ने बांग्लादेश पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए गैर शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान किया है। इस बिल में खासतौर पर बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में गैर मुस्लिम समुदायों के साथ होने वाली हिंसा और पक्षपात का बड़ा हिस्सा है। बांग्लादेश से आए घुसपैठिए और अल्पसंख्यकों खासतौर पर हिंदुओं के साथ होने वाली हिंसा के ऊपर है। इसी वजह से बांग्लादेश की सरकार और मीडिया भारत में इस बिल से जुड़ी गतिविधियों को काफी बारीकी से फॉलो कर रहे हैं।

पीएम मोदी से मिलीं थी शेख हसीना

इससे पहले असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन की प्रक्रिया हुई। फाइनल लिस्ट में तकरीबन 19 लोग बाहर रह गए।  उनका क्या होगा? क्या उन्हें उनके बतन बापस किया जाएगा। क्योंकि इसकी सबसे ज्यादा संख्या बांग्लादेश से आए लोगों की वजह से यह मसला बांग्लादेश और भारत के बीच का काफी संवेदनशील बन गया है। अक्टूबर महीने में बांग्लादेश कीं प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत के दौरे पर आई थी। पीएम नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात में बांग्लादेश ने कहा कि भारत ने उन्हें आश्वासन दिया है, कि एनआरसी लागू करना और इससे जुड़ी कोई नहीं बात भारत का आंतरिक मसला है। सीएबी Citizenship Amendment Bill 2019 पर चर्चा के दौरान भारतीय संसद में बांग्लादेश के अंदर हिंदुओं पर अत्याचार और पक्षपात, दमन की बात उठी थी। जिस पर बांग्लादेश ने इस पर आपत्ति जताई। 

विदेश मंत्रीअब्दुल मोमिन ने मीडिया से कहा कि हिंदुओं के दमन से जुड़े आरोप गलत हैं। उनका कहना था कि बांग्लादेश में कोई अल्पसंख्यक वर्ग है ही नहीं। सभी बराबर हैं। 

 यह बिल पास होने पर बांग्लादेशी मीडिया की क्या प्रक्रिया रही?

 11 दिसंबर को Citizenship Amendment Bill राज्यसभा में पास कर दिया इसके ऊपर बांग्लादेश मीडिया में भी काफी कवरेज दिखी। कुछ सतर्क, कुछ सलाह भरी, कुछ में सहमत तो कुछ में गुस्सा और बौखलाहट थी। बांग्लादेश के कई अखबारों में संपादकीय इसी मुद्दे पर लिखे गए। “द डेली स्टार” ने 12 दिसंबर को अपने संपादकीय में लिखा कि,

 असम की एनआरसी और सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल Citizenship Amendment Bill को देखकर लगता है कि, क्या धर्मनिरपेक्ष और व्यवस्थाओं का सम्मान करने वाले हिंदुस्तान का अंत हो रहा है? क्या आरएसएस और सावरकर के सपने पूरे हो रहे हैं? यह विविध भारत के सबसे बुनियादी सिद्धांतों और मूल्यों पर हमला है। वह मूल्य जिनके ऊपर इस देश की बुनियाद रखी गई थी। भारत में सांप्रदायिक राजनीति को स्वीकृति देगा।

 यह सच है कि द्वारा चुने गए नेताओं को अपनी समझ के हिसाब से देश और इसके लोगों के हित में नीतियां बनाने का अधिकार है। मगर लोकप्रिय जन अधिकार ऐसी राजनीति का अधिकार नहीं होना चाहिए। जहां संसद में हासिल बहुमत का बेजा इस्तेमाल कर पक्ष महत्वपूर्ण राजनीति की जाए। ऐसी पॉलिटिक्स जो देश की बुनियादी आदर्शों के विरुद्ध हो।  सीएवी और एनआरसी दोनों मुसलमानों के साथ पक्षपात करते हैं। इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि सीएवी सीधे-सीधे हिंदुओं को बांग्लादेश से पलायन करने के लिए प्रोत्साहित करती है। भारत की आत्मा का यू खत्म होना काफी दुखी करने वाला है। 

इसके अलावा बांग्लादेश केक अखबारों न्यूज़ चैनलों में भी इस बिल के पास होने की बात तमाम खबरें चली एक प्रमुख अखबार ने तो गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा इंडिया टुडे और आज तक को दिए गए एक इंटरव्यू में कही गई बातों पर सवाल खड़े किए हैं बताया गया है कि गृहमंत्री जैसे गंभीर पद पर आसीन लोगों को ऐसी बातें शोभा नहीं देती.

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