झांसी : पातालकोट एक्सप्रेस पर कूदा था ट्रेक्टर-ट्राली, अब रेलवे में हड़कंप

झांसी। आंतरी-संदलपुर के मध्य शुक्रवार रात पहाड़ी से गिरी भारी वस्तु से टकराने पर पातालकोट एक्सप्रेस के पांच कोच रगड़ खा गये। एसी कोच के कांच व पायदान आदि क्षतिग्रस्त हो गये। हादसे में उक्त जगह से निकली मालगाड़ी के 16वें डिब्बे के ऊपर ट्रैक्टर ट्रॉली गिरने से हड़कंप मच गया।हादसे के बाद अफसरों ने मौके पर पहुंचकर पटरी से उतरी मालगाड़ी के डिब्बे को चढ़ाया। इधर हादसे के बाद पटरी दो जगह टूटने के कारण मरम्मत कार्य के बाद करीब 5 घण्टे बाद दिल्ली-झांसी रूट पर गाड़ियों का संचालन कराया। हादसे को लेकर मण्डल रेल प्रशासन ने चार अफसरों की टीम का गठन कर जांच के आदेश दिये है।

गौरतलब है कि 10 जनवरी की शाम ग्वालियर से चलकर झांसी आ रही पातालकोट एक्सप्रेस संदलपुर-आंतरी के मध्य से गुजर रही थी। तभी अचाकन कोच पर पहाड़ी से कोई भारी वस्तु गिरी। जिससे चपेट में आने से पातालकोच के कोच नम्बर बी-1 तथा एसएलआर के शीशे व पायदान क्षतिग्रस्त हो गये। इससे पहले कि प्रशासन सतर्क होता, कुछ देर बाद ही वहां से निकल रही एमटी स्पेशल मालगाड़ी किलोमीटर नम्बर 1207 के समीप गार्ड के बिन से 16वां डिब्बा पटरी से उतरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इधर हादसे के बाद रेल पटरी टूटने के कारण इंजीनियरिंग विभाग के अफसरों ने रेल लाइन की मरम्मत कराने के बाद करीब 5 घण्टे बाद रेलवे रूट पर ट्रेनों का संचालन शुरू कराया।

रेलवे अफसरों की माने तो संदलपुर-आंतरी पहाड़ी एरिया है, वर्तमान में तीसरी लाइन का काम चलने पर आरबीएनएल द्वारा पहाड़ी पर लोहे की फेंसिंग कराई जा रही है। इसको लेकर वहां ट्रैक्टर-ट्रॉली के अलावा जनरेटर लगाकर लोहे की फेंसिंग की बेल्डिंग कराई जा रही थी। इसी बीच ट्रैक्टर-ट्रॉली पहाड़ी से नीचे गिर गया। जिससे हादसा हुआ है। डीआरएम संदीप माथुर ने दुर्घटना की जांच के लिये वरिष्ठ रेल अफसरों की चार सदस्यीय टीम का गठन कर दिया है। टीम में वरिष्ठ मण्डल संरक्षा आयुक्त विपिन सिंह, मण्डल विद्युत अभियंता परिचालन योगेश कुमार, वरिष्ठ मण्डल इंजीनियर सामान्य, मण्डल सुरक्षा आयुक्त उमाकांत को शामिल किया गया।

अफसरों ने मौके का किया निरीक्षण: संदलपुर-आंतरी के बीच हुई घटना के बाद मण्डल रेलवे के अफसरों ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया। घटना स्थल पर ट्रैक्टर के टूट हुये पार्ट्स बिखरे पड़े थे। उक्त रेलवे रूट पहाड़ी क्षेत्र से घिरा हुआ है। जहां पर ट्रैक्टर-ट्रॉली का आना मुश्किल है। वहीं पहाड़ी के ऊपर से आरबीएनएल का काम चल रहा था। जिससे अंदेशा लगाया गया है कि पहाड़ी पर सामान लाने-ले जाने के लिये ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग किया जा रहा है।

 

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